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भारत रूसी तेल की खरीद बंद करेगा, अमेरिका में $500 अरब का निवेश करेगा: व्हाइट हाउस

अपडेटेड: 4 फरवरी 2026 | न्यूयॉर्क / वॉशिंगटन

अमेरिका और भारत के बीच एक बड़ा व्यापार समझौता सामने आया है, जिसे दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों में एक अहम मोड़ माना जा रहा है। व्हाइट हाउस ने दावा किया है कि भारत ने रूस से तेल की खरीद बंद करने और इसके साथ-साथ अमेरिका में करीब 500 अरब डॉलर (लगभग ₹41 लाख करोड़) के निवेश और खरीद का वादा किया है।

यह जानकारी व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने मंगलवार (3 फरवरी 2026) को दी। उन्होंने बताया कि यह समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और भारतीय प्रधानमंत्री Narendra Modi के बीच हुई सीधी बातचीत के बाद तय हुआ।

रूसी तेल की जगह अमेरिकी तेल खरीदेगा भारत: व्हाइट हाउस का दावा

प्रेस ब्रीफिंग में Karoline Leavitt ने कहा,

“राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत के साथ एक और बेहतरीन व्यापार समझौता किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने रूस से तेल की खरीद अब नहीं करने और इसके बजाय अमेरिका से तेल खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। संभव है कि भारत वेनेजुएला से भी तेल खरीदे। इससे सीधे तौर पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था और आम अमेरिकी नागरिकों को फायदा होगा।”

अमेरिका लंबे समय से भारत पर दबाव बना रहा था कि वह रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना कम करे, क्योंकि यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं।

अमेरिका में $500 अरब के निवेश का वादा

व्हाइट हाउस के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका में $500 अरब डॉलर के निवेश और खरीद का भी वादा किया है। यह निवेश कई अहम क्षेत्रों में किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं:

  • ऊर्जा (Energy)
  • परिवहन (Transportation)
  • कृषि और कृषि उत्पाद
  • विमान और रक्षा उपकरण
  • टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग

Karoline Leavitt ने कहा कि यह निवेश अमेरिका में नौकरियों के सृजन, ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास को मजबूती देगा।

टैरिफ में कटौती, व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

इस व्यापार समझौते के तहत:

  • अमेरिका भारतीय उत्पादों पर लगाए गए उच्च आयात शुल्क (टैरिफ) में बड़ी कटौती करेगा
  • भारत अमेरिकी कृषि उत्पादों, ऊर्जा और औद्योगिक सामानों के लिए अपने बाजार को और खोलेगा

हालांकि, भारत ने डेयरी, चावल और कुछ कृषि क्षेत्रों में अपने घरेलू किसानों के हित में कुछ सुरक्षा उपाय बनाए रखने के संकेत दिए हैं।

भारत की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं

अब तक भारत सरकार ने औपचारिक रूप से यह पुष्टि नहीं की है कि वह रूस से तेल की खरीद पूरी तरह बंद कर देगी। जानकारों का कहना है कि भारत की प्राथमिकता हमेशा से ऊर्जा सुरक्षा रही है और मौजूदा रूसी तेल अनुबंधों को तुरंत खत्म करना व्यावहारिक रूप से आसान नहीं होगा।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और सवाल

भारत में इस समझौते को लेकर राज्यसभा में विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि:

  • किसानों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
  • क्या अमेरिकी कृषि उत्पादों से घरेलू बाजार प्रभावित होगा?
  • रूसी तेल छोड़ने से ईंधन की कीमतें बढ़ेंगी या नहीं?

सरकार से समझौते की पूरी शर्तें सार्वजनिक करने की मांग की जा रही है।

भू-राजनीतिक और आर्थिक असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता:

  • भारत-अमेरिका रिश्तों को नई ऊंचाई देगा
  • वैश्विक तेल बाजार में बड़े बदलाव ला सकता है
  • रूस-भारत ऊर्जा संबंधों को प्रभावित कर सकता है

हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि घोषणाओं और ज़मीनी अमल के बीच अभी कई सवाल खुले हुए हैं।

आगे क्या?

दोनों देशों के अधिकारी अब इस समझौते के डिटेल्ड फ्रेमवर्क, निवेश की समयसीमा और कानूनी प्रक्रियाओं पर काम करेंगे। आने वाले हफ्तों में इसके औपचारिक दस्तावेज सामने आने की उम्मीद है।

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